
रिपोर्ट: Rohtas Darshan चुनाव डेस्क | नई दिल्ली | Updated: 8 मार्च 2026: केंद्र सरकार ने टेलीविजन न्यूज चैनलों की टीआरपी (TRP) रिपोर्टिंग पर चार हफ्तों के लिए रोक लगाने का बड़ा फैसला किया है। यह कदम विशेष रूप से सनसनीखेज खबरों और हाइपरबोलिक कवरेज के मामलों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार का कहना है कि हाल के समय में कुछ चैनल्स ने समाचार संवेदनशीलता और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की जगह केवल रेटिंग बढ़ाने के लिए सनसनीखेज और प्रोपेगैंडा वाली खबरें प्रसारित की हैं। इन खबरों ने न केवल दर्शकों को गुमराह किया बल्कि सामाजिक और राजनीतिक माहौल पर भी असर डाला।
🔹 रोक का दायरा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह रोक टीवी न्यूज चैनलों की TRP सर्वेक्षण रिपोर्टिंग पर लागू होगी। चार हफ्तों के दौरान चैनलों को ऑडियंस मीट्रिक्स साझा करने और उन्हें रेटिंग बढ़ाने के लिए कंटेंट रणनीति बदलने की अनुमति नहीं होगी।
सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले के तहत:
सेंसिटिव खबरों का सनसनीखेज प्रस्तुतिकरण प्रतिबंधित होगा।
TRP रिपोर्ट में किसी भी तरह का भ्रामक डेटा या हेरफेर नहीं किया जा सकेगा।
मीडिया हाउस और पत्रकारों को नागरिकों की सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द का ध्यान रखना होगा।
🔹 सरकार का उद्देश्य
सूत्रों के मुताबिक, यह कदम सूचना के विश्वसनीय और जिम्मेदार प्रसार को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। सरकार का मानना है कि TRP की होड़ और सनसनीखेज खबरें लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे चैनलों को सामाजिक जिम्मेदारी के साथ समाचार प्रस्तुत करने का संदेश जाएगा। मीडिया में कुछ लोगों का मानना है कि यह कदम TRP आधारित प्रतिस्पर्धा में गिरावट और गुणवत्ता वाले समाचार की दिशा में बदलाव लाएगा।
🔹 आगे की प्रक्रिया
केंद्र सरकार की सूचना और प्रसारण मंत्रालय की टीम अगले चार हफ्तों में चैनलों की रिपोर्टिंग मॉनिटर करेगी। इसके बाद इस रोक के प्रभाव और जरूरत के आधार पर इसे बढ़ाने या हटाने पर फैसला लिया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम मीडिया और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है, ताकि जनता तक सटीक और जिम्मेदार खबरें पहुंचें और फर्जी सनसनी फैलाने वाली खबरों पर नियंत्रण हो।


