
रिपोर्ट: Rohtas Darshan चुनाव डेस्क | नई दिल्ली/देशभर | Updated: 9 मार्च 2026: मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के बीच एक बड़ा सैन्य टकराव सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार Iran ने United States Navy के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने United States Fifth Fleet पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। यह हमला Manama, Bahrain में स्थित अमेरिकी नौसैनिक मुख्यालय के पास हुआ।
ईरानी मीडिया के दावे के अनुसार इस हमले में 21 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है और उन्होंने अलग-अलग रिपोर्टों में हताहतों की संख्या को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है।
कैसे हुआ हमला
रिपोर्टों के मुताबिक ईरान की ओर से मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जिनमें कथित तौर पर Shahed-136 जैसे ड्रोन भी शामिल थे। हमले के बाद बेस के आसपास काले धुएं के बड़े गुबार उठते देखे गए और कई सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आईं।
हमले में रडार सिस्टम, संचार केंद्र और कुछ सेवा भवनों को भी नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है। यह ठिकाना खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के संचालन का मुख्य केंद्र माना जाता है।
क्यों अहम है यह हमला
United States Fifth Fleet खाड़ी क्षेत्र, अरब सागर और हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों की निगरानी करता है। यह फ्लीट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz की सुरक्षा से भी जुड़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस स्तर के ठिकाने पर हमला हुआ है, तो यह ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष के बड़े विस्तार का संकेत हो सकता है।
अमेरिका का क्या कहना है
अमेरिकी अधिकारियों ने शुरुआती प्रतिक्रिया में कहा कि हमले के दौरान कई सैनिकों ने बंकरों में शरण ले ली थी और वास्तविक नुकसान का आकलन किया जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि बेस पर 21 मौतों के दावे की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
पहले भी बढ़ चुका है तनाव
हाल के दिनों में United States और Iran के बीच सैन्य तनाव तेजी से बढ़ा है। कुछ दिनों पहले अमेरिकी सेना ने हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया था, जिसमें दर्जनों ईरानी सैनिकों की मौत की खबर सामने आई थी।
विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच यह टकराव अब खुले सैन्य संघर्ष का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरे मध्य-पूर्व और वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है।


