
रिपोर्ट: Rohtas Darshan चुनाव डेस्क | नई दिल्ली | Updated: 8 मार्च 2026: बिहार और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की खबरों ने हाल ही में राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर तहलका मचा दिया था। सोशल मीडिया और कुछ समाचार चैनलों पर यह दावा तेजी से वायरल हो गया कि केंद्र सरकार इस दिशा में तैयारी कर रही है।
लेकिन, केंद्र ने इस खबर को पूरी तरह से खारिज किया है। आधिकारिक बयान में कहा गया कि वर्तमान में किसी नए केंद्र शासित प्रदेश के गठन की कोई योजना नहीं है और संसद में भी इस संबंध में कोई प्रस्ताव पेश नहीं किया गया।
सरकार ने बताया कि नए केंद्र शासित प्रदेश के निर्माण के लिए अनुच्छेद 3 के तहत राज्य विधानसभाओं की मंजूरी और संसद की स्वीकृति जरूरी है। फिलहाल न तो इस दिशा में कोई कदम उठाया गया है और न ही किसी राज्य से इस पर चर्चा हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अफवाहों का फैलना राजनीतिक और चुनावी माहौल के चलते होता है। बिहार और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाके न केवल भू-राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी संवेदनशील हैं। इस वजह से किसी भी प्रशासनिक बदलाव की खबरें तुरंत लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाती हैं।
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. मनीष कुमार कहते हैं, “इस तरह की अफवाहें अक्सर राजनीतिक रोटेशन, विकास योजनाओं या चुनावी रणनीतियों के संदर्भ में सामने आती हैं। जनता को अफवाहों पर भरोसा नहीं करना चाहिए और केवल आधिकारिक घोषणाओं को ही मानना चाहिए।”
केंद्र ने आम जनता से अपील की है कि अफवाहों पर विश्वास न करें और सरकारी प्रेस रिलीज, संसद की घोषणाओं और विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों को ही सही जानकारी मानें।
निष्कर्ष: फिलहाल बिहार और पश्चिम बंगाल के किसी हिस्से को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की कोई योजना नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी कोई प्रशासनिक बदलाव केवल औपचारिक प्रक्रिया, राज्य विधानसभाओं की सहमति और संसद की मंजूरी के बाद ही संभव है।
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