रिपोर्ट: Rohtas Darshan चुनाव डेस्क | दुबई | Updated: 27 फ़रवरी 2026: दुबई को अक्सर “टैक्स-फ्री” शहर कहा जाता है, क्योंकि यहां व्यक्तिगत आय (Personal Income) पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगता। यही वजह है कि दुनिया भर के प्रोफेशनल्स और कारोबारी यहां काम करना पसंद करते हैं। लेकिन सवाल उठता है—जब सरकार नागरिकों से इनकम टैक्स नहीं लेती, तो उसका खजाना कैसे भरता है?

असल में दुबई की अर्थव्यवस्था बहुआयामी (Diversified) है, जो सर्विस सेक्टर, ट्रेड, टूरिज्म, एविएशन और सरकारी निवेश पर आधारित है।

1. सरकारी फीस और पब्लिक सर्विस से कमाई

दुबई की आय का बड़ा हिस्सा विभिन्न सरकारी फीस और एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज से आता है।

• वीजा फीस, रेजिडेंसी परमिट और वर्क परमिट चार्ज

• ट्रेड लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण की फीस

• म्युनिसिपल टैक्स और प्रॉपर्टी से जुड़े चार्ज

• यूटिलिटी सर्विस (पानी-बिजली) शुल्क

• वेस्ट मैनेजमेंट फीस

इसके अलावा ट्रैफिक नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। दुबई का ऑटोमेटेड फाइन सिस्टम बेहद सख्त है, जो सरकार के लिए राजस्व का स्थायी स्रोत है।

2. कॉर्पोरेट टैक्स और अप्रत्यक्ष कर

हालांकि व्यक्तिगत आय पर टैक्स नहीं है, लेकिन व्यवसायों पर टैक्स लागू है।

United Arab Emirates ने 2023 से AED 3,75,000 से अधिक के वार्षिक मुनाफे पर 9% कॉर्पोरेट टैक्स लागू किया है।

इसके अलावा:

• अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं पर 5% वैल्यू एडेड टैक्स (VAT)

• विदेशी बैंकों पर लगभग 20% टैक्स

• तेल कंपनियों पर 55% तक टैक्स

यानी सरकार का बड़ा राजस्व कॉर्पोरेट और इनडायरेक्ट टैक्स से आता है।

3. टूरिज्म और एविएशन: अर्थव्यवस्था की रीढ़

दुबई दुनिया के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में से एक है। हर साल लाखों पर्यटक यहां आते हैं, जिससे होटल, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल और एंटरटेनमेंट सेक्टर को भारी फायदा होता है।

• होटल बुकिंग पर टूरिज्म लेवी

• डाइनिंग और मनोरंजन गतिविधियों पर शुल्क

• एयरपोर्ट डिपार्चर और सर्विस चार्ज

Dubai International Airport दुनिया के सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों में से एक है। यहां से गुजरने वाले हर यात्री से सर्विस और डिपार्चर फीस ली जाती है, जो एविएशन रेवेन्यू का बड़ा स्रोत है।

4. सरकारी कंपनियों से मुनाफा

दुबई सरकार कई वैश्विक स्तर की कंपनियों की मालिक है, जो सीधे राजस्व उत्पन्न करती हैं।

• Emirates – दुनिया की अग्रणी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस में से एक

• रियल एस्टेट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स

• कमर्शियल लीजिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश

Burj Khalifa जैसे प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट्स न केवल पर्यटन आकर्षण हैं, बल्कि रियल एस्टेट, होटल और कमर्शियल स्पेस के जरिए भारी आय भी उत्पन्न करते हैं।

निष्कर्ष

दुबई ने पारंपरिक इनकम टैक्स मॉडल के बजाय सर्विस-आधारित और निवेश-आधारित अर्थव्यवस्था विकसित की है। मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार के अनुकूल नीतियां और वैश्विक निवेश आकर्षित करने की रणनीति ने इसे दुनिया के सबसे समृद्ध शहरों में शामिल कर दिया है।

इस तरह, बिना पर्सनल इनकम टैक्स के भी दुबई का सरकारी खजाना कई स्रोतों से लगातार भरता रहता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !! Copyright Reserved © RD News Network