
रिपोर्ट: Rohtas Darshan चुनाव डेस्क | बिहार | Updated: 2 मार्च 2026: बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान तेजी से बढ़ रहा है। नामांकन की आखिरी तारीख 5 मार्च है और होली के ठीक बाद उम्मीदवारों के नामों का ऐलान होने की संभावना है। इस बीच सबसे बड़ी चर्चा—क्या सिर्फ 4 विधायकों के सहारे Upendra Kushwaha फिर राज्यसभा पहुंच सकते हैं? और क्या Bharatiya Janata Party उनकी मददगार बनेगी?
5 सीटें, लेकिन समीकरण उलझे
बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों पर चुनाव होना है। आंकड़ों के हिसाब से एनडीए को 4 सीटें लगभग तय मानी जा रही हैं (2 जेडीयू, 2 भाजपा)। लेकिन असली मुकाबला 5वीं सीट पर है, जहां खेल दिलचस्प हो गया है।
महागठबंधन ने भी 6वां उम्मीदवार उतारने का संकेत दिया है, जबकि उसके पास जीत के लिए जरूरी 41 विधायकों का आंकड़ा नहीं है। नेतृत्व कर रहे Lalu Prasad Yadav कथित तौर पर अतिरिक्त समर्थन जुटाने की कोशिश में हैं—AIMIM और बसपा के विधायकों से बातचीत की चर्चा है।
NDA की रणनीति: सेंधमारी या मास्टरस्ट्रोक?
एनडीए की नजर 5वीं सीट पर भी है। सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी खेमे के कुछ असंतुष्ट विधायकों पर उसकी नजर है। अगर 2–3 अतिरिक्त वोटों का इंतजाम हो गया, तो 5वीं सीट भी एनडीए के खाते में जा सकती है।
राज्यसभा चुनाव में व्हिप लागू नहीं होता, इसलिए क्रॉस वोटिंग की आशंका हमेशा बनी रहती है। ऐसे में “मैनेजमेंट” और “सहमति” दोनों अहम हो जाते हैं।
जेडीयू में सस्पेंस: रिपीट या रिटायर?
Janata Dal (United) के दो मौजूदा सांसद—रामनाथ ठाकुर और हरिवंश—रिटायर हो रहे हैं। पार्टी उन्हें दोबारा मौका देगी या नए चेहरे लाएगी, यह साफ नहीं है।
रामनाथ ठाकुर, जो कर्पूरी ठाकुर के पुत्र हैं, जातीय समीकरण में फिट बैठते हैं। उन्हें हटाने पर संदेश क्या जाएगा—यह भी पार्टी के लिए बड़ा सवाल है। दूसरी ओर, नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम भी सियासी गलियारों में चर्चा में है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि कुछ भी नहीं।
भाजपा किसे भेजेगी? फिर चौंकाएगी?
भाजपा का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि वह आखिरी वक्त पर चौंकाने वाले फैसले लेती है। पिछली बार भी तमाम कयासों के बीच उपेंद्र कुशवाहा और मनन मिश्रा को राज्यसभा भेजा गया था। इस बार पवन सिंह और अन्य नामों की चर्चा जरूर है, लेकिन अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व के पास है।
कुशवाहा के सामने ‘बड़ी डील’?
सबसे ज्यादा चर्चा उपेंद्र कुशवाहा को लेकर है। उनकी पार्टी के पास महज 4 विधायक हैं—अपने दम पर राज्यसभा पहुंचना संभव नहीं। लेकिन कोइरी वोटरों पर उनके प्रभाव को देखते हुए भाजपा उन्हें साथ रखना चाहती है।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा ने कुशवाहा के सामने प्रस्ताव रखा है—अगर वे अपनी पार्टी का विलय भाजपा में करते हैं, तो उन्हें राज्यसभा का टिकट और केंद्र में मंत्री पद तक मिल सकता है। बदले में भाजपा की बिहार में विधायक संख्या बढ़ेगी और राज्यसभा में भी उसकी ताकत मजबूत होगी।
चिराग फैक्टर भी एक्टिव
अगर कुशवाहा वाला फार्मूला काम करता है, तो Chirag Paswan को भी साधा जा सकता है। चर्चा है कि उनकी मां रीना पासवान के लिए राज्यसभा सीट की मांग उठी है। हालांकि चिराग पहले इससे इनकार करते रहे, लेकिन हालिया बैठकों के बाद उनके रुख में नरमी की खबरें हैं।
निष्कर्ष: आखिरी दिन होगा बड़ा खुलासा?
राज्यसभा की 5वीं सीट पर असली सस्पेंस कायम है। क्या एनडीए सभी 5 सीटें जीतकर विपक्ष को झटका देगा? क्या कुशवाहा भाजपा का दामन थामेंगे? या महागठबंधन आखिरी वक्त पर समीकरण पलट देगा?
फिलहाल सबकी नजर 5 मार्च पर टिकी है—जब नामांकन के साथ बिहार की सियासत का नया अध्याय खुल सकता है।


