
रिपोर्ट: Rohtas Darshan चुनाव डेस्क | नई दिल्ली | Updated: 10 मार्च 2026: देश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर चल रही बहस के बीच Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि अब UCC लागू करने का समय आ गया है।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। लंबे समय से देश में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, लेकिन समान नागरिक संहिता लागू होने पर सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू किया जा सकता है।
क्या है मामला
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है, और समय के साथ इस दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में भी राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने की बात कही गई है।
क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)?
Uniform Civil Code का मतलब है कि देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे मामलों में एक समान कानून लागू हो।
अभी भारत में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, जैसे हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदायों के अपने-अपने कानून हैं।
पहले भी उठ चुकी है मांग
देश में लंबे समय से UCC लागू करने को लेकर बहस होती रही है। कुछ लोग इसे समानता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानते हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इससे धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। कई दल लंबे समय से UCC के पक्ष में रहे हैं, जबकि कुछ दल इसके खिलाफ अपनी राय रखते हैं।
क्या जल्द लागू होगा UCC?
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी सरकार और नीति निर्माताओं पर दबाव बढ़ा सकती है, लेकिन इसे लागू करने का फैसला अंततः संसद और सरकार को ही लेना होगा।


