
रिपोर्ट: Rohtas Darshan चुनाव डेस्क | मुंबई | Updated: 5 मार्च 2026: Maharashtra की अर्थव्यवस्था को लेकर विधानसभा में पेश प्री-बजट इकोनॉमिक सर्वे में एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। एक ओर राज्य का सरकारी कर्ज तेजी से बढ़ने का अनुमान है, तो दूसरी ओर आर्थिक विकास की रफ्तार भी मजबूत रहने की उम्मीद जताई गई है।
गुरुवार को विधानसभा में वित्त राज्य मंत्री Ashish Jaiswal ने यह प्री-बजट इकोनॉमिक सर्वे पेश किया। सर्वे के अनुसार 2025-26 में महाराष्ट्र का कुल सार्वजनिक कर्ज बढ़कर 9.32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
कर्ज में तेज बढ़ोतरी का अनुमान
सर्वे में बताया गया कि राज्य का बकाया सरकारी कर्ज 2024-25 में 8.39 लाख करोड़ रुपये था, जो अगले वित्त वर्ष में बढ़कर 9.32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। यानी इसमें करीब 18.3 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
हालांकि इसके बावजूद राज्य सरकार का कर्ज-से-जीएसडीपी अनुपात 17 से 18 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है, जो पिछले कई वर्षों से इसी दायरे में बना हुआ है।
आर्थिक विकास दर राष्ट्रीय औसत से अधिक
इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार 2025-26 में महाराष्ट्र की आर्थिक विकास दर 7.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक मानी जा रही है।
साथ ही मौजूदा कीमतों पर राज्य का नॉमिनल जीएसडीपी लगभग 51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो करीब 10.4 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। वहीं 2011-12 की स्थिर कीमतों पर वास्तविक जीएसडीपी 28.83 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
राजकोषीय अनुशासन बरकरार
कर्ज बढ़ने के बावजूद राज्य सरकार ने राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने का दावा किया है। सर्वे में बताया गया कि:
राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit): जीएसडीपी का 2.7%
राजस्व घाटा (Revenue Deficit): जीएसडीपी का 0.9%
ये दोनों आंकड़े Fiscal Responsibility and Budget Management Act के तहत तय 3 प्रतिशत की सीमा से नीचे हैं।
सर्विस सेक्टर सबसे आगे
आर्थिक गतिविधियों में सबसे बड़ा योगदान सर्विस सेक्टर का रहने की उम्मीद है।
सर्विस सेक्टर: 9% वृद्धि
इंडस्ट्री सेक्टर: 5.7% वृद्धि
कृषि और संबद्ध गतिविधियां: 3.4% वृद्धि
राज्य सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 1.51 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा है, जिसमें से लगभग 93,000 करोड़ रुपये विकास परियोजनाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं।
कृषि क्षेत्र की स्थिति
सर्वे के अनुसार खरीफ सीजन में राज्य में 157.27 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई। इससे कई फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई गई है।
अनाज उत्पादन: 10.6% वृद्धि
गन्ना: 22% वृद्धि
दालें: 28.2% वृद्धि
तिलहन: 47.4% वृद्धि
हालांकि रबी तिलहन उत्पादन में 16.2% की गिरावट का अनुमान लगाया गया है।
प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से ज्यादा
महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था देश में सबसे बड़ी बनी हुई है। सर्वे के मुताबिक 2024-25 में राज्य का नॉमिनल जीएसडीपी राष्ट्रीय जीडीपी का लगभग 14 प्रतिशत रहेगा।
राज्य की प्रति व्यक्ति आय 3,47,903 रुपये आंकी गई है, जो देश के औसत 2,19,575 रुपये से काफी ज्यादा है।
राजस्व में भी वृद्धि की उम्मीद
2025-26 में राज्य की राजस्व प्राप्तियां 5.61 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इसमें से लगभग 4.77 लाख करोड़ रुपये टैक्स से मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा 16वें वित्त आयोग चक्र के दौरान केंद्र सरकार से राज्य को केंद्रीय करों में 6.441 प्रतिशत हिस्सेदारी और करीब 1.09 लाख करोड़ रुपये अनुदान मिलने की संभावना है।
वित्तीय स्थिति स्थिर रहने के संकेत
सर्वे के अनुसार दिसंबर 2025 तक राज्य सरकार ने बजट में तय राजस्व प्राप्तियों का 66.2 प्रतिशत और राजस्व खर्च का लगभग 60 प्रतिशत हासिल कर लिया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज बढ़ने के बावजूद महाराष्ट्र की मजबूत आर्थिक वृद्धि और कर संग्रह राज्य की वित्तीय स्थिति को संतुलित बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।


