Sunil Kumar Singh की शराब डिलीवरी चुनौती

रिपोर्ट: Rohtas Darshan चुनाव डेस्क | पटना | Updated: 26 फ़रवरी 2026: बिहार में लागू शराबबंदी कानून को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कुछ जनप्रतिनिधि भी समय-समय पर इसकी समीक्षा की मांग करते रहे हैं। इसी बीच राजद के विधान पार्षद सुनील कुमार सिंह ने विवादित बयान देते हुए दावा किया कि बिहार में ऐसी कोई जगह नहीं है, जहां शराब उपलब्ध न हो।

“बजट सत्र के अंतिम दिन दिखा दूंगा”

बुधवार को विधानमंडल परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सुनील कुमार सिंह ने खुली चुनौती देते हुए कहा कि बजट सत्र के अंतिम दिन वे विधानमंडल परिसर में ही शराब की डिलीवरी कराकर दिखा देंगे। उनका कहना था कि 2016 में शराबबंदी लागू होने के बाद खपत कम होने के बजाय कई गुना बढ़ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि शराबबंदी के बावजूद अवैध कारोबार फल-फूल रहा है और प्रशासन इसे रोक पाने में असफल रहा है।

‘सूखा नशा’ पर भी जताई चिंता

सुनील कुमार ने दावा किया कि अब राज्य में शराब से ज्यादा “सूखा नशा” युवाओं को बर्बाद कर रहा है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों—उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड—साथ ही नेपाल में शराबबंदी नहीं है, ऐसे में बिहार में शराब की आवाजाही को पूरी तरह रोक पाना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन युवाओं को शराब उपलब्ध नहीं होती, वे अन्य प्रकार के नशे की ओर मुड़ रहे हैं। उनके मुताबिक, पंजाब, मुंबई और पुणे की तुलना में बिहार में अब सूखे नशे का कारोबार अधिक फैल चुका है।

‘राजा राम मोहन राय’ वाला तंज

राजद नेता ने तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग शराबबंदी और दहेज प्रथा के खिलाफ कानून बनाकर खुद को “राजा राम मोहन राय” की तरह याद किए जाने की इच्छा रखते हैं। लेकिन उन्होंने दावा किया कि जैसे दहेज प्रथा कानून बनने के बावजूद पूरी तरह खत्म नहीं हुई, वैसे ही शराबबंदी की स्थिति भी है।

सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप

सुनील कुमार सिंह ने राज्य सरकार पर विभिन्न योजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उन्होंने नल-जल योजना, सड़क निर्माण और पुल-पुलिया परियोजनाओं में कमीशनखोरी और अनियमितताओं का दावा किया। उनका कहना था कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार व्याप्त है और इसकी सच्चाई अब ज्यादा समय तक छिपाई नहीं जा सकती।

राजनीतिक प्रतिक्रिया की संभावना

राजद नेता के इस बयान से राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ने की संभावना है। शराबबंदी कानून पहले से ही बिहार की राजनीति का संवेदनशील मुद्दा रहा है। ऐसे में विधानमंडल परिसर में शराब की डिलीवरी की चुनौती ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है। अब देखना होगा कि सरकार और अन्य राजनीतिक दल इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या इस मुद्दे पर विधानसभा में कोई औपचारिक चर्चा होती है।

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