
रिपोर्ट: Rohtas Darshan चुनाव डेस्क | पटना | Updated: 25 फ़रवरी 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार से तीन दिवसीय बिहार दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे राज्य के सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा व्यवस्थाओं, प्रशासनिक तैयारियों और चल रही विकास पहलों की समीक्षा करेंगे। हालांकि उनके दौरे से पहले ही बिहार की सियासत गरमा गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने उनके कार्यक्रम को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
राजद का हमला
राजद के प्रवक्ता भाई वीरेंद्र ने मंगलवार को बिहार विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अमित शाह “सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने” के उद्देश्य से बिहार आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि होली का त्योहार नजदीक है और ऐसे समय में इस तरह की राजनीतिक बयानबाजी से सामाजिक माहौल प्रभावित हो सकता है।
भाई वीरेंद्र ने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अपना काम करने के लिए आ रहे हैं, लेकिन बिहार में “कोई घुसपैठिया नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि जब-जब जिन राज्यों में चुनाव होते हैं, तब इस तरह के मुद्दे उठाए जाते हैं। राजद नेता ने मांग की कि यदि गृह मंत्री बिहार आ रहे हैं तो उन्हें राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने की घोषणा करनी चाहिए।
सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा समीक्षा
अमित शाह के दौरे का मुख्य फोकस भारत-नेपाल सीमा से जुड़े जिलों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक स्थिति की समीक्षा है। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, 25 फरवरी को शाम चार बजे वे पूर्णिया पहुंचेंगे। वहां से हेलीकॉप्टर के जरिए किशनगंज जाएंगे, जहां कलेक्ट्रेट में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। किशनगंज में ही उनका रात्रि विश्राम निर्धारित है।
अररिया और लेट्टी सीमा चौकी का दौरा
26 फरवरी को गृह मंत्री अररिया जाएंगे। यहां वे लेट्टी सीमा चौकी पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके बाद वे पुलिस अधीक्षकों और सीमावर्ती जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे, जिसमें भारत-नेपाल सीमा से संबंधित सुरक्षा, निगरानी और अन्य प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होगी।
अंतिम दिन फिर पूर्णिया में बैठक
27 फरवरी को अमित शाह एक बार फिर पूर्णिया में अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा, विकास परियोजनाओं की प्रगति और समन्वय तंत्र की समीक्षा की जाएगी।
राजनीतिक मायने
अमित शाह का यह दौरा प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन राजद की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि इसे राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। आगामी चुनावी परिदृश्य और सीमावर्ती क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए यह दौरा बिहार की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।


