रिपोर्ट: Rohtas Darshan चुनाव डेस्क | पटना | Updated: 26 नवंबर 2025: बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी को राज्य सरकार के भवन निर्माण विभाग द्वारा 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने का नोटिस जारी किया गया है। यह आवास पिछले दो दशक से राबड़ी देवी के उपयोग में है। विभाग ने नए आदेश के तहत उन्हें बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर हार्डिंग रोड स्थित आवास संख्या 39 आवंटित किया है।

सरकारी नोटिस जारी होने के तुरंत बाद यह मुद्दा राजनीतिक सरगर्मी का केंद्र बन गया। आरजेडी समर्थकों और नेताओं ने इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” करार दिया, जबकि समर्थकों ने सोशल मीडिया पर इसे “लालू परिवार के प्रति अनादर” बताया।

पटना के पॉश वीआईपी क्षेत्र में स्थित 10 सर्कुलर रोड पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित केंद्र रहा है. यहीं से लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की राजनीति संचालित होती रही है. राजद की अहम रणनीतियां प्रेस कांफ्रेंस और राजनीतिक बैठकों का केंद्र यहीं बंगला रहा है. 2005 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद राबड़ी देवी को यह आवास पूर्व मुख्यमंत्री कोटा से दिया गया था. तभी से यह बंगला लगातार राबड़ी देवी के नाम आवंटित रहा है. 2005 से लालू परिवार यहीं रहता आया है.

दरअसल 10 सर्कुलर आवास को लेकर सरकार की ओर से साफ किया गया है कि 10 सर्कुलर रोड पूर्व मुख्यमंत्री के लिए आरक्षित है, लेकिन हाई कोर्ट एक फैसले के चलते अब पूर्व मुख्यमंत्री को आजीवन बंगले का हक नहीं मिलता. राबड़ी देवी इस समय एमएलसी और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष है, इसलिए उन्हें इस पद के अनुरूप हार्डिंग रोड वाला केंद्रीय पूल आवास दिया जा रहा है ‌.

2017 में जिस कानूनी लड़ाई की शुरुआत हुई थी उसी ने बिहार में आवास को लेकर यह स्थिति पैदा की है. दरअसल लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव को 2015 में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद डिप्टी सीएम के तौर पर पांच देशरत्न मार्ग वाला आवास मिला, लेकिन 2017 में सरकार बदलते ही उन्हें यह आवास खाली करने का आदेश मिला तो उन्होंने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी. हालांकि, हाई कोर्ट न सिर्फ तेजस्वी यादव की याचिका खारिज की बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री को मिलने वाले आजीवन आवास, गाड़ी, सुरक्षा और स्टाफ की सुविधा खत्म करने का बड़ा फैसला सुना दिया.

माना जाता है कि अगर यह याचिका दायर न होती तो राबड़ी देवी पूर्व मुख्यमंत्री के नाते 10 सर्कुलर रोड में रह सकती थीं. इसके अलावा भवन निर्माण विभाग के आदेश के अनुसार राबड़ी देवी को 39 होर्डिंग रोड का नया बंगला दिया गया है. यह आवास उन्हें नेता प्रतिपक्ष के कोटे से आवंटित हुआ है. इसके बाद अब 10 सर्कुलर रोड छोड़कर उन्हें नए सरकारी आवास में शिफ्ट होना होगा.

रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया: ‘दिल से कैसे निकालोगे?’

राबड़ी देवी की बेटी और लालू यादव की दूसरी बेटी रोहिणी आचार्य ने X (ट्विटर) पर नोटिस साझा करते हुए सरकार पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने लिखा: “सुशासन बाबू का विकास मॉडल! करोड़ों लोगों के मसीहा लालू प्रसाद यादव का अपमान करना पहली प्राथमिकता है। घर से तो निकाल देंगे, लेकिन बिहार की जनता के दिल से कैसे निकालिएगा? सेहत ठीक नहीं है, तो कम से कम राजनीतिक कद का ही सम्मान रख लेते।”

उनके पोस्ट के बाद आरजेडी समर्थकों ने पूरे बिहार में इस फैसले की आलोचना शुरू कर दी और इसे “अनुचित व असंवेदनशील कदम” बताया।

आरजेडी प्रवक्ता शक्ति यादव का बयान: ‘परंपरा तोड़ी गई’

पार्टी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए आरजेडी प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा कि यह मामला परंपरा और राजनीतिक शुचिता के खिलाफ है। उन्होंने कहा: “राबड़ी देवी पिछले 20 साल से इस आवास में रह रही हैं। ऐसी परंपरा नहीं रही है कि पूर्व मुख्यमंत्री के नाम पर आवंटित आवास को खाली कराया जाए। यह राजनीतिक शुचिता का हनन है।”

उन्होंने आगे कहा कि यह फैसला राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण हुआ है और भाजपा-जेडीयू गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा: “बीजेपी का दबदबा अब एक अणे मार्ग तक पहुँच चुका है। जेडीयू पूरी तरह दबाव में है और हर निर्णय बीजेपी के इशारे पर ले रही है।”

‘हम कोर्ट क्यों जाएंगे?’ — आरजेडी

जब उनसे पूछा गया कि क्या इस मामले में आरजेडी कोर्ट जाएगी, तो शक्ति यादव ने स्पष्ट रूप से कहा:

“हम कोर्ट क्यों जाएंगे? बीजेपी ने यदि ऐसा करना ठान लिया है, तो वह करेगी ही। यह स्पष्ट राजनीतिक प्रतिशोध है।”

सरकार का रुख

भवन निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया कि राबड़ी देवी को नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उपयुक्त सरकारी आवास पहले ही आवंटित किया जा चुका है और उन्हें वहीं स्थानांतरित होना होगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार यह नोटिस “प्रशासनिक प्रक्रिया” के तहत जारी किया गया है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज

राबड़ी देवी के आवास खाली कराने संबंधी यह घटना बिहार की राजनीति में हलचल पैदा कर चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना न केवल लालू-राबड़ी परिवार के राजनीतिक प्रभाव से जुड़ी है, बल्कि 2025–26 के चुनावी समीकरणों को भी सीधे प्रभावित कर सकती है।

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