
रिपोर्ट: Rohtas Darshan चुनाव डेस्क | पटना | Updated: 6 मार्च 2026: बिहार की राजनीति में उस समय नई हलचल मच गई जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की खबरों के बाद जनता दल (यू) के कार्यकर्ताओं में नाराजगी खुलकर सामने आने लगी। शुक्रवार को पटना स्थित जदयू कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता इकट्ठा हुए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और कई पोस्टर चिपकाकर पार्टी नेतृत्व से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
पोस्टरों में दिखा कार्यकर्ताओं का गुस्सा
जदयू कार्यालय के बाहर लगाए गए पोस्टरों में साफ तौर पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी झलक रही थी। एक पोस्टर में लिखा था:
“नीतीश सेवक कर रहा पुकार, नेता करें अपने निर्णय पर पुनर्विचार।”
दूसरे पोस्टर में लोकतंत्र और जनादेश का हवाला देते हुए लिखा गया:
“लोकतंत्र में जनता के जनादेश और आत्मसम्मान का हनन अब नहीं होगा सहन। जनादेश के सम्मान में – नीतीश सेवक।”
इन पोस्टरों के जरिए कार्यकर्ताओं ने यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी ने विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के चेहरे पर जीता था, ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाना समर्थकों के लिए स्वीकार्य नहीं है।
पार्टी कार्यालय और सीएम आवास के बाहर जुटे समर्थक
शुक्रवार को बड़ी संख्या में जदयू कार्यकर्ता पटना में पार्टी कार्यालय और मुख्यमंत्री आवास के पास जमा हो गए। उन्होंने मांग की कि नीतीश कुमार अपने राज्यसभा जाने के फैसले पर दोबारा विचार करें और बिहार की राजनीति में ही सक्रिय बने रहें।
कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि जनता ने जदयू को सत्ता में इसलिए भेजा क्योंकि पार्टी का नेतृत्व नीतीश कुमार कर रहे थे। ऐसे में उनका मुख्यमंत्री पद छोड़ना समर्थकों और मतदाताओं के साथ अन्याय होगा।
कार्यकर्ता ने शुरू की भूख हड़ताल
विरोध के बीच एक जदयू समर्थक ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर भूख हड़ताल भी शुरू कर दी। उसने मीडिया से बातचीत में कहा:
“हम नीतीश कुमार को बिहार से जाने नहीं देंगे। हमारी इच्छा है कि वे आखिरी समय तक बिहार की सेवा करें। जिस तरह वे कहते हैं कि पूरा बिहार उनका परिवार है, उसी तरह हम भी उन्हें अपने परिवार का सदस्य मानते हैं।”
राज्यसभा चुनाव से गरमाई सियासत
गौरतलब है कि बिहार में जल्द ही राज्यसभा की 5 सीटों पर चुनाव होने हैं। इस चुनाव को लेकर सभी दलों ने अपनी राजनीतिक रणनीति तेज कर दी है।
भाजपा ने Nitin Nabin और Shivesh Kumar को उम्मीदवार बनाया है।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता Upendra Kushwaha भी राज्यसभा की दौड़ में शामिल हैं।
जदयू की ओर से Ramnath Thakur का नाम पहले से तय माना जा रहा था।
इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा खुद राज्यसभा चुनाव लड़ने की घोषणा ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा और अटकलों को जन्म दे दिया है।
सरकार में बदलाव की अटकलें तेज
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं, तो बिहार की राजनीति में बड़ा सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता है। इससे सरकार के नेतृत्व और गठबंधन की रणनीति में भी बदलाव संभव है।
हालांकि, जदयू के कई कार्यकर्ता इस फैसले का खुलकर विरोध कर रहे हैं और चाहते हैं कि नीतीश कुमार ही बिहार के मुख्यमंत्री बने रहें। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस नाराजगी को कैसे संभालता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


