
रिपोर्ट: Rohtas Darshan चुनाव डेस्क | ईरान-अमेरिका | Updated: 2 मार्च 2026: ईरान-अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर हलचल तेज हुई है। सैन्य टकराव और बड़े पैमाने पर हमलों के बाद अब दोनों देशों की ओर से बातचीत के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि वे ईरान की नई नेतृत्व संरचना के साथ वार्ता के लिए तैयार हैं, वहीं ईरान ने भी मध्यस्थता के बाद बातचीत की इच्छा जताई है।
इस पूरी कवायद में खाड़ी देश Oman ने एक बार फिर अहम भूमिका निभाई है।
‘ऑपरेशन फ्यूरी’ के बाद बदले संकेत
अमेरिका द्वारा चलाए गए कथित “ऑपरेशन फ्यूरी” के तहत तेहरान समेत करीब 20 शहरों में 24 घंटे के भीतर बड़े हमले हुए। रिपोर्टों के मुताबिक, इस कार्रवाई में ईरान की शीर्ष नेतृत्व संरचना को भारी नुकसान पहुंचा।
इन घटनाओं के बाद क्षेत्रीय हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। ईरान की ओर से जवाबी हमलों में मिसाइलों का व्यापक इस्तेमाल किया गया, जिससे पश्चिम एशिया के कई देश भी तनाव की जद में आ गए।
इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि ईरानी पक्ष बातचीत करना चाहता है और उन्होंने भी वार्ता के लिए सहमति दे दी है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि बातचीत कब और कहां होगी। इससे संकेत मिलता है कि बैक-चैनल डिप्लोमेसी सक्रिय हो चुकी है, लेकिन औपचारिक घोषणा अभी बाकी है।
ओमान की सक्रिय मध्यस्थता
पश्चिम एशिया में पहले भी कई बार संवेदनशील वार्ताओं की मेजबानी कर चुका Oman इस बार भी मध्यस्थ के रूप में सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, ओमान ने दोनों पक्षों को वार्ता की मेज पर लाने के लिए सक्रिय पहल की।
गौरतलब है कि अतीत में भी अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल वार्ताओं में ओमान की भूमिका अहम रही है। यही वजह बताई जा रही है कि हालिया संघर्ष के दौरान ईरान ने अपने हमलों में ओमान को निशाना नहीं बनाया।
भारत की कूटनीतिक सक्रियता
इस संकट के बीच भारत ने भी संतुलित और शांतिपूर्ण रुख अपनाया है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने ओमान के विदेश मंत्री से बातचीत कर मौजूदा हालात पर चर्चा की। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थक है।
भारत के लिए पश्चिम एशिया सामरिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है—चाहे वह ऊर्जा आपूर्ति हो, व्यापारिक मार्ग हों या वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का सवाल।
इंडोनेशिया की भी पहल
इस बीच Indonesia ने भी तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है। राष्ट्रपति Prabowo Subianto ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वे तेहरान जाकर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं, बशर्ते दोनों पक्ष सहमत हों। ईरान के दूतावास ने इस पहल का स्वागत किया है।
क्या सीजफायर संभव है?
हालांकि जमीन पर हालात अब भी नाजुक हैं, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर हो रही हलचल से यह संकेत जरूर मिल रहा है कि दोनों पक्ष लंबे युद्ध से बचना चाहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ओमान की मध्यस्थता सफल रहती है और अमेरिका-ईरान के बीच प्रारंभिक संवाद स्थापित हो जाता है, तो सीमित सीजफायर या मानवीय युद्धविराम की घोषणा संभव हो सकती है।
फिलहाल दुनिया की नजरें इस संभावित वार्ता पर टिकी हैं, क्योंकि यह संघर्ष सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकता है।


