आर० डी० न्यूज़ नेटवर्क : 30 मई 2022 : वाराणसी। वाराणसी जिला अदालत ने ज्ञानवापी मामले को 4 जुलाई को सुनवाई के लिए निर्धारित किया है। अदालत काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी परिसर के भीतर श्रृंगार गौरी स्थल की दैनिक पूजा की अनुमति मांगने वाली पांच हिंदू महिलाओं की याचिका पर आगे की सुनवाई करेगी। मुस्लिम पक्ष ने सोमवार को अपना तर्क पेश किया और अदालत में हिंदू पक्ष की याचिका पर अपनी बिंदु-दर-बिंदु आपत्ति (प्वाइंट-टू-प्वाइंट ऑब्जेक्शन) दर्ज की। पांच हिंदू महिलाओं ने काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी परिसर में श्रृंगार गौरी स्थल पर किसी विशेष दिन के बजाय पूजा करने के लिए साल भर की अनुमति दिए जाने की मांग की है।

मुस्लिम पक्ष ने तर्क दिया है कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि उपासना स्थल अधिनियम, 1991 पूजा स्थल के रूपांतरण पर रोक लगाता है और किसी भी उपासना स्थल के धार्मिक चरित्र को बनाए रखने का आदेश देता है, क्योंकि यह 15 अगस्त, 1947 से ही अस्तित्व में है।

महिलाओं की ओर से याचिका दायर करने के बाद शहर की एक निचली अदालत ने परिसर का वीडियो सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था। सर्वेक्षण के बाद हिंदू पक्ष ने दावा किया कि मस्जिद के वुजुखाना में एक ‘शिवलिंग’ मिला है।

मुस्लिम पक्ष ने इस महीने की शुरूआत में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और मांग की कि वह उपासना स्थल अधिनियम की पृष्ठभूमि के खिलाफ याचिका के गुण-दोष पर फैसला करे।उनके वकील ने शीर्ष अदालत को इसके खिलाफ अदालत के आदेश के बावजूद मीडिया में लीक की जा रही सर्वेक्षण रिपोर्ट से अवगत कराया और हिंदू पक्ष पर नैरेटिव को बदलने के लिए रिपोर्ट को लीक करने का आरोप लगाया।

इससे पहले वाराणसी सिविल कोर्ट ने कथित लीक पर सर्वेक्षण का नेतृत्व करने के लिए नियुक्त आयुक्त को बर्खास्त कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की ‘संवेदनशीलता’ और ‘जटिलताओं’ का हवाला देते हुए मामले को सिविल कोर्ट से जिला अदालत में स्थानांतरित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एक वरिष्ठ और अनुभवी न्यायिक अधिकारी को मामले की सुनवाई करनी चाहिए।

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