
रिपोर्ट: Rohtas Darshan चुनाव डेस्क | नई दिल्ली | Updated: 2 मार्च 2026: देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक अहम परिवर्तन होने जा रहा है। Central Board of Secondary Education (CBSE) ने घोषणा की है कि 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 6 के छात्रों के लिए तीन-भाषा प्रणाली (3-Language Policy) लागू की जाएगी। यह कदम National Education Policy (NEP 2020) और National Curriculum Framework for School Education (NCFSE 2023) की सिफारिशों के अनुरूप उठाया जा रहा है।
यह बदलाव केवल विषयों की संख्या बढ़ाने का निर्णय नहीं है, बल्कि भारत की भाषाई विविधता, सांस्कृतिक पहचान और बहुभाषी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक व्यापक शिक्षा सुधार माना जा रहा है।
क्या है नई 3-भाषा नीति?
नई नीति के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
कक्षा 6 से छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा।
इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय मूल की भाषाएं (Native to India) होनी चाहिए।
तीसरी भाषा के रूप में अंग्रेज़ी या अन्य विदेशी भाषा का चयन किया जा सकता है।
अंग्रेज़ी को इस ढांचे में “विदेशी भाषा” (Foreign Language Option) की श्रेणी में माना जाएगा।
इसका अर्थ यह है कि यदि कोई स्कूल अंग्रेज़ी को एक भाषा के रूप में पढ़ा रहा है, तो उसे दो भारतीय भाषाओं के साथ संतुलन बनाना होगा।
अंग्रेज़ी की नई स्थिति: क्यों मानी जाएगी ‘विदेशी’ भाषा?
अब तक अधिकांश CBSE स्कूलों में अंग्रेज़ी को प्रमुख या अनिवार्य भाषा के रूप में पढ़ाया जाता रहा है। लेकिन नई नीति के तहत:
अंग्रेज़ी को भारतीय भाषाओं की श्रेणी में नहीं गिना जाएगा।
यदि अंग्रेज़ी पढ़ाई जा रही है, तो छात्रों को साथ में दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य रूप से लेनी होंगी — जैसे हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, मराठी, बंगाली, पंजाबी आदि।
इस निर्णय का उद्देश्य भारतीय भाषाओं को शिक्षा प्रणाली में अधिक मजबूती देना है, ताकि छात्र अपनी मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़े रहें।
क्या छात्र भाषा बदल सकते हैं?
NEP 2020 के दिशा-निर्देशों के अनुसार:
छात्र कक्षा 6 या 7 में अपनी चुनी हुई भाषाओं में बदलाव कर सकते हैं।
लेकिन माध्यमिक शिक्षा (कक्षा 10) तक पहुंचते-पहुंचते उन्हें तीन भाषाओं में बुनियादी दक्षता दिखानी होगी।
इनमें से कम से कम एक भारतीय भाषा साहित्य स्तर (Literature Level) तक पढ़नी होगी।
इससे छात्रों को लचीलापन भी मिलेगा और भाषाई आधार भी मजबूत होगा।
क्या 10वीं बोर्ड में भी तीसरी भाषा अनिवार्य होगी?
NCFSE 2023 की सिफारिश के अनुसार:
कक्षा 9 और 10 में भी तीनों भाषाएं पढ़ाई जानी चाहिए।
वर्ष 2031 में CBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों को तीसरी भाषा की परीक्षा भी देनी पड़ सकती है।
यदि यह लागू होता है, तो वर्तमान दो-भाषा प्रणाली की जगह पूरी तरह तीन-भाषा परीक्षा प्रणाली लागू हो जाएगी।
इस नीति के पीछे सरकार का उद्देश्य
भारतीय भाषाओं का संरक्षण और संवर्धन
छात्रों में बहुभाषी कौशल (Multilingual Skills) विकसित करना
मातृभाषा आधारित शिक्षा को प्रोत्साहन देना
राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विविधता को मजबूत करना
वैश्विक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ स्थानीय पहचान बनाए रखना
विशेषज्ञों का मानना है कि बहुभाषी शिक्षा से बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमता (Cognitive Ability) बेहतर होती है और वे विभिन्न संस्कृतियों को बेहतर समझ पाते हैं।
अभिभावकों और स्कूलों पर क्या होगा असर?
स्कूलों को नए भाषा शिक्षकों की नियुक्ति करनी पड़ सकती है।
पाठ्यक्रम और टाइम-टेबल में बड़े बदलाव होंगे।
अभिभावकों को बच्चों के लिए भाषा चयन में अधिक जागरूक निर्णय लेने होंगे।
छात्रों पर शुरुआती वर्षों में अध्ययन का दबाव थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन दीर्घकाल में यह लाभकारी हो सकता है।
निष्कर्ष
CBSE की 3-भाषा नीति भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकती है। 2026-27 से शुरू होकर 2031 तक इसका प्रभाव बोर्ड परीक्षाओं तक दिखाई देगा।
यह सुधार केवल भाषाओं की संख्या बढ़ाने का कदम नहीं है, बल्कि भारतीय भाषाई विरासत को मजबूत करने और छात्रों को बहुभाषी, आत्मविश्वासी और वैश्विक स्तर पर सक्षम बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
अब पूरे देश की नजर इस बात पर है कि स्कूल और छात्र इस नई व्यवस्था को किस तरह अपनाते हैं और यह बदलाव जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है।


