ईरान युद्ध के बीच भारत सुरक्षित, तेल-LPG का पर्याप्त भंडार

रिपोर्ट: Rohtas Darshan चुनाव डेस्क | नई दिल्ली | Updated: 6 मार्च 2026: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और Iran से जुड़े युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंकाओं के बीच भारत सरकार ने बड़ा बयान दिया है। सरकार के अनुसार देश के पास फिलहाल कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (रसोई गैस) का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि भारत इस समय ऊर्जा आपूर्ति के मामले में काफी मजबूत और आरामदायक स्थिति में है। उन्होंने कहा कि देश के पास इतना भंडार मौजूद है कि अगर Strait of Hormuz के रास्ते तेल की आपूर्ति अस्थायी रूप से प्रभावित भी होती है, तब भी भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय तेल कंपनियां केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे दुनिया के कई अन्य देशों से भी कच्चा तेल आयात कर रही हैं। इसी रणनीति के तहत भारत ने पिछले कुछ वर्षों में Russia से तेल आयात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी महज 0.2 प्रतिशत थी, लेकिन अब इसमें तेजी से वृद्धि हुई है। फरवरी 2026 में भारत ने अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 20 प्रतिशत रूस से खरीदा, जो करीब 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन (1.04 मिलियन बैरल प्रति दिन) रहा।

सरकार ने उन खबरों को भी खारिज कर दिया है जिनमें Mangalore Refinery and Petrochemicals Limited (एमआरपीएल) के बंद होने की बात कही जा रही थी। अधिकारियों ने साफ किया कि रिफाइनरी पूरी तरह से चालू है और वहां पर्याप्त कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद है।

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को देखते हुए Ministry of Petroleum and Natural Gas (एमओपीएनजी) ने देश की सभी रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत रिफाइनरियों से कहा गया है कि प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी गैसों का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर एलपीजी बनाने में किया जाए, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस की कमी का सामना न करना पड़े।

दरअसल, मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के प्रमुख मार्ग प्रभावित हो सकते हैं। खासकर Strait of Hormuz से होकर गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यह समुद्री मार्ग दुनिया में तेल और गैस के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है।

इसके अलावा दुनिया के दूसरे सबसे बड़े एलएनजी निर्यातक Qatar से गैस आपूर्ति पर भी संभावित असर की चर्चा है। हालांकि भारत सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में देश के पास ऊर्जा सुरक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत मौजूद हैं।

सरकार ने भरोसा दिलाया है कि जरूरत पड़ने पर पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उपयोग भी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए किया जाएगा, ताकि आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की कमी या कीमतों में अचानक बढ़ोतरी का सामना न करना पड़े।

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